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News Posts by Vcpl Jbp

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पलपल संवाददाता, जबलपुर. रेलवे बोर्ड ने सभी रेल जोनों से लार्जेस योजना के तहत 27 अक्टूबर 2017 के पूर्व लंबित ऐसे मामलों की रिपोर्ट मांगी है, जिसमें इस योजना के तहत रेल कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हो चुकी थी व उनके आश्रित बच्चों का मेडिकल व अन्य परीक्षण हो चुका था, किंतु उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी थी. माना जा रहा है कि रेलवे बोर्ड ऐसे लंबित मामलों को एकमुश्त निराकरण की तैयारी में है. दरअसल इस मामले को डबलूसीआरईयू के महामंत्री मुकेश गालव ने रेलवे बोर्ड के समक्ष उठाया था, उस दौरान एडीशनल मेंबर कार्मिक मनोज पांडेय ने इस मामले में कोई ठोस निर्णय लिये जाने का आश्वासन दिया था.
इस संबंध में पमरे एम्पलाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया
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कि रेलवे ने लार्जेस स्कीम को अक्टूबर 2017 में अचानक बंद कर दिया था, जिस समय इस स्कीम को बंद करने की घोषणा की गई थी, उस समय पूरे देश में ऐसे हजारों मामले नियुक्ति के लिए अटके थे, जिनमें से पमरे में 6 सौ मामले थे, जिसमें काफी कर्मचारी रिटायर हो चुके थे, उनके बच्चों का मेडिकल परीक्षण भी हो चुका था, केवल नियुक्ति दी जानी थी, साथ ही ऐसे कई मामले थे, जिनमें कर्मचारियों का रिटायरमेंट मंजूर कर लिया था औैर उनके बच्चों का परीक्षण होना शेष रहा, लेकिन इस स्कीम को बंद किये जाने से यह मामले भी अटक गये थे.
इस मामले को वेस्ट सेंट्रल रेलवे ने एआईआरएफ के माध्यम से रेलवे बोड के समक्ष प्रमुखता से उठाया था. जिस पर 15 जनवरी 2019 को रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को एक पत्र जारी किया है, जिसमें 27 अक्टूबर 2017 के पूर्व लार्जेस स्कीम के तहत इस तरह के जितने मामले लंबित हैं, उन सभी प्रकरणों की जानकारी मांगी है. माना जा रहा है कि रेलवे बोर्ड पेंडिंग इन मामलों का निराकरण शीघ्र करेगी.
पमरे के 6 सौ से ज्यादा कर्मचारी अधर में अटक गये थे पमरे एम्पलाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया कि रेलवे बोर्ड के लार्जेस स्कीम समाप्त करने के निर्देश से पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर, भोपाल व कोटा मंडलों के लगभग 6 सौ कर्मचारी अधर में अटक गये थे, क्योंकि उन्होंने लार्जेस स्कीम के तहत प्रक्रिया पूरी करते हुए आवेदन दिया था और उनके बच्चों की स्क्रीनिंग व मेडिकल टेस्ट भी हो चुका था, सिर्फ रेल कर्मचारी को रिटायरमेंट देकर उनके बच्चों को नियुक्ति प्रदान करना था, एडीशनल मेंबर पर्सनल से मिले थे यूनियन महामंत्री, मिला था आश्वासन इस मामले को लेकर गुरूवार 11 अक्टूबर 2018 को डबलूसीआरईयू के महामंत्री मुकेश गालव नई दिल्ली में रेलवे बोर्ड में एडीशनल मेंबर पर्सनल मनोज पाण्डे से मुलाकात करते हुए पमरे के 6 सौ से अधिक कर्मचारियों के मामले को प्रमुखता से उठाया था.
श्री गालव ने उन्हें बताया कि रेलवे बोर्ड की नई पॉलिसी से पमरे के एक भी कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा, क्योंकि जो भी मामले पमरे में पेंडिंग हैं, उसमें लार्जेस स्कीम के तहत रेलकर्मियों के बच्चों का मेडिकल टेस्ट, स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी थी, मामले सिर्फ रेलकर्मी को रिटायरमेंट देकर उनके बच्चे को नियुक्ति पत्र प्रदान करना है. श्री गालव ने बताया कि रेलवे बोर्ड के एडीशनल मेंबर पर्सनल मनोज पाण्डे ने उनकी बातों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया था.
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. रेल प्रशासन ने अचानक गरीब रथ एक्सप्रेस के दिन को शुक्रवार से शनिवार कर दिया, जिसके बाद आज बुधवार 16 नवम्बर को उसने जिन यात्रियों की टिकट शुक्रवार थी, उन सभी को शनिवार की ट्रेन में बदल दिया. अब यह यात्रियों को तय करना है कि उन्हें जाना है तो जाओ, वरना टिकट कैंसिल कराओ.
वैसे तो रेलवे 120 दिन पहले तक की टिकट कन्फर्म कराता है, लेकिन ट्रेन रद्द होती है या किन्हीं कारणोंवश उसमें बदलाव होता है, इस सबका सर्वाधिकार वह अपने पास रखती है, ऐसे ही कुछ जबलपुर-मुंबई-जबलपुर गाड़ी संख्या 12187-12188 गरीब रथ एक्सप्रेस के मामले में भी सामने आयी है. गत 14 नवम्बर को रेलवे ने गरीब रथ एक्सप्रेस जो सप्ताह में तीन दिन सोमवार,
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बुधवार व शुक्रवार को जबलपुर से तथा वापसी में मुंबई से मंगलवार, गुरूवार व शनिवार को रवाना होती है, उसमें से शुक्रवार की बजाय जबलपुर से शनिवार को तथा वापसी में मुंबइ से शनिवार की बजाय रविवार को रवाना होगी, यह निर्णय इसी सप्ताह से लागू हो गया. इसका कारण आगामी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से मुंबई (सीएसएमटी) से हजरत निजामुद्दीन के बीच नई राजधानी एक्सप्रेस को शुरू करना है.
स्वत: टिकट को शनिवार में बदला
बताया जाता है कि रेल प्रशासन ने आज बुधवार को शुक्रवार 18 जनवरी को गाड़ी संख्या 12187 गरीब रथ एक्सप्रेस में जिन यात्रियों का टिकट था, उन सभी को 19 जनवरी शनिवार की तारीख में बदल दिया, जबकि वापसी में 19 जनवरी की जगह 20 जनवरी की टिकट मान लिया गया. साथ ही यह व्यवस्था भी की कि यदि यात्री इसी टिकट पर यात्रा करना चाहते हैं तो कर सकते हैं, यदि कोई यात्री नहीं करना चाहते तो उन्हेें रेलवे फुल रिफंड देगा.
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पलपल संवाददाता, जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे में अफसरशाही जमकर हावी है, यहां के कुछ अधिकारी अपने मुखिया यानी महाप्रबंधक तक के आदेश को हवा में उड़ा रहे हैं, ऐसा ही एक मामला केेंद्रीय रेलवे अस्पताल का सामने आया है, जहां पर एक महिला नर्स के साथ सहकर्मी मेल नर्स द्वारा उत्पीडऩ की शिकायत पर जांच टीम की अनुशंसा पर आरोपी कर्मी का भोपाल किये गये तबादले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, अब मामले में लीपापोती करके आरोपी को जबलपुर मंडल के ही किसी अन्य स्टेशन पर पोस्टिंग की तैयारी में अधिकारी लगे हुए हैं.
बताया जाता है कि पश्चिम मध्य रेलवे के केंद्रीय रेलवे अस्पताल जबलपुर में एक महिला नर्स के साथ सहकर्मी मेल नर्स सज्जन कुमार द्वारा काफी
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लंबे समय तक उत्पीडऩ किये जाने के मामले में जांच रिपोर्ट आने के काफी समय बाद17 दिसंबर 2018 को महाप्रबंधक के निर्देश पर आरोपी मेल नर्स का इंटर डिवीजन तबादला भोपाल करते हुए उसे अस्पताल प्रबंधन द्वारा रिलीव भी कर दिया गया. अस्पताल प्रबंधन द्वारा आरोपी कर्मी के तबादले का नोटिस अस्पताल के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा किया गया, साथ ही उसे डाक व अन्य माध्यमों से भी प्रेषित किया गया, किंतु इतनी प्रक्रिया होने के बाद संबंधित कर्मचारी ने भोपाल मे ज्वाइन नहीं किया.
अनुपस्थिति में पमरे अधिकारी उसके तबादले आवेदन पर कर रहे विचार
रेल सूत्रों के मुताबिक गंभीर शिकायत के आरोप में स्थानांतरित किये गये मेल नर्स के मामले में यह विडंबना ही है कि पमरे के अधिकारी उक्त मेल नर्स द्वारा ड्यूटी पर अनुपस्थित होने के बावजूद इसके जबलपुर मंडल में ही एनकेजे स्थानांतरण के लिए दिये गये आवेदन को एंटरटेन कर रहे हैं औैर महाप्रबंधक के समक्ष उसके पूर्व के तबादले को निरस्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं. पमरे के कुछ आला अधिकारियों द्वारा की जा रही इस लामबंदी से महिला अपने को ठगा सा महसूस कर रही है.
बताया जाता है कि पीडि़त महिला अब इस मामले को महिला आयोग, रेलवे बोर्ड व पुलिस के समक्ष उठाने की तैयारी में हैं. बताया जाता है कि आरोपी मेल नर्स सज्जन कुमार चूंकि मजदूर संघ का अस्पताल इकाई का पदाधिकारी रहा है, इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करना पड़ा. संघ का प्रतिनिधि होने के कारण उसके खिलाफ कार्रवाई व तबादले का अधिकारी महाप्रबंधक के अधिकार क्षेत्र में आता है.
विशाखा कमेटी ने की थी जांच की
बताया जाता है कि मंडल रेल प्रशासन ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशाखा कमेटी की अनुशंसाओं के मुताबिक 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया. इस कमेटी में रेलवे अस्पताल की एक वरिष्ठ महिला चिकित्सक, एक महिला चीफ लॉ सहायक व मंडल कार्मिक अधिकारी शामिल रहे.
महिला नर्स डर के कई माह ड्यूटी से रही अनुपस्थित
बताया जाता है कि अपने सहकर्मी मेल नर्स के खिलाफ लिखित शिकायत करने के बाद कार्रवाई में विलंब किये जाने से महिला नर्स काफी डरी-सहमी रही, उसने कई माह तक अस्पताल में अपनी नौकरी ज्वाईन नहीं की थी.
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. रेलवे के वाहन स्टेंड में वाहन रखना महंगा हो गया है. पश्चिम मध्य रेल प्रशासन ने जबलपुर के 1 नंबर प्लेटफार्म के बाहर (सदर ओर) का जो नया ठेका दिया है, उसमें उसने ठेकेदार को दोगुना वसूली का अधिकार दे दिया है. खास बात यह है कि रेल कर्मचारियों के लिए भी यह राशि बढ़ा दी गई है. साथ ही इस किराये के अलावा 18 प्रतिशत जीएसटी भी वाहन स्वामियों से वसूली जायेगी. रेल कर्मचारियों के वाहनों पर शुल्क दोगुना किये जाने का विरोध शुरू हो गया है. वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने इस बढ़ोत्तरी का विरोध करते हुए मामले को उच्च स्तर पर उठाने का निर्णय लिया है.
पमरे प्रशासन ने 1 जनवरी 2019 से जबलपुर के
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प्लेटफार्म नंबर 1 के बाहर की ओर का वाहन स्टेंड का नया ठेका दिया है, उस ठेके में रेल प्रशासन ने दो गुना से लेकर चार गुना अधिक रेट बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. सबसे अधिक दर रेल कर्मचारियों जो कि उसी स्टेशन पर कार्यरत हैं, के लिए मंथली बढ़ाई गई है, पहले उन्हें 50 रुपए लगता था, जो अब सीधे 200 रुपए कर दिया गया है, इस राशि में 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से भुगतान करना होगा. यूनियन ने जताया विरोध रेल कर्मचारियों के लिए वाहन स्टेंड शुल्क में चार गुना से ज्यादा की वृद्धि से कर्मचारी में आक्रोश बढ़ गया है.
खासकर रेलवे के रनिंग स्टाफ जो ट्रेन संचालन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, वे अपना वाहन स्टेंड पर खड़ा कर ट्रेन लेकर जाते हैं, उन्हें अब 50 रुपए की बजाय सीधे 200 रुपए तो देना ही होगा, साथ ही इसमें 36 रुपए जीएसटी का भी लगेगा. इस व्यवस्था पर पमरे एम्पलाइज यूनियन के मंडल सचिव नवीन लिटोरिया व मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला ने विरोध जताते हुए कहा है कि एक साथ 4 गुना से ज्यादा दर रेल कर्मचारियों के लिए बढ़ाना उचित नहीं है, इस राशि को कम किया जाना चाहिए, वे इस मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठायेंगे और मांग करेंगे कि रनिंग स्टाफ के लिए अलग से वाहन स्टेंड की व्यवस्था करें, ताकि वे वहां पर अपना वाहन सुरक्षित व कम शुल्क पर रख सकें.
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. ट्रेनों व प्लेटफार्मों पर अवैध वेंडरिंग पर सख्य पमरे के नये मुख्य सुरक्षा आयुक्त/महानिरीक्षक एएन मिश्रा की सख्ती से पमरे के तीनों रेल मंडलों जबलपुर, भोपाल व कोटा के आरपीएफ पोस्ट व चौकी प्रभारी टेंशन में हैं, उन्हें लगता है कि यदि अवैध वेंडर्स उनके क्षेत्र में पाया जाता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है. उल्लेखनीय है कि आरपीएफ कर्मियों की मिलीभगत और ठेकेदार की मनमानी के कारण ट्रेनों व स्टेशन पर अवैध वेंडरों की संख्या लगातार बढ़ती रही है, किंतु अब इन पर नकेल कसने प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है. रेलवे स्टेशन एवं ट्रेनों में अगर अवैध वेण्डर पकड़े गए तो आरपीएफ कर्मियों पर भी कार्रवाई की जायेगी, जिनकी ड्यूटी अवैध वेण्डरों को रोकने की होगी.
इस
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मामले में पमरे के आरपीएफ मुखिया ने अब कड़ी कार्रवाई के संकेत देना शुरू कर दिये हैं. इस मामले में हाल ही में पमरे के आरपीएफ प्रमुख एएन मिश्रा ने आरपीएफ अधिकारियों की बैठक लेकर यह कह दिया है कि किसी भी हालत में स्टेशन पर अवैध वेण्डर नहीं मिलना चाहिए. जो भी वेण्डर काम कर रहे हैं उनके पास बाकायदा कार्ड होना चाहिए, ताकि उनकी पहचान की जा सके. सबसे बड़ी समस्या अवैध वेण्डरों द्वारा बेची जाने वाली स्तरहीन खाद्य सामग्री है, जिसके तेल व अन्य सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखने की बजाय पैसे कमाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
इस तरह की खाद्य सामग्री जिसमें आलू बंडे, समोसे, इडली, सांभर बड़ा, कटलेट, उबले चने आदि शामिल हैं का विक्रय अवैध वेण्डरों द्वारा किया जाता है. जिस समय जबलपुर स्टेशन पर धरपकड़ शुरू की जाती है तो अवैध वेण्डर मदन महल, देवरी, अधारताल, गोसलपुर, सिहोरा, स्लीमनाबाद स्टेशनों की ओर रुख कर लेते हैं. कुछ दिनों के बाद वे फिर से मुख्य स्टेशनों पर अड्डा जमा लेते हैं. ठेकेदारों द्वारा एक की आड़ में दो वेण्डरों का इस्तेमाल करने की बात भी पिछली बार सामने आई थी.
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